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: सहस्त्र चंडी महायज्ञ के साथ श्रीमद् भागवत कथा विधि विधान के साथ संपन्न हुआ...

Admin

Thu, Oct 6, 2022

अम्बिकापुर.  नगर में परमहंस स्वामी शारदानंद जी महाराज के कृपाछाया में आयोजित सहस्त्र चंडी महायज्ञ , श्रीमद् भागवत कथा व भारतवर्ष के विभिन्न प्रांतों से पधारे विद्वान संतो के संत सम्मेलन का विधि विधान के साथ संपन्न हुआ.  सहस्त्र चंडी महायज्ञ के समापन पर अपने आशीर्वचन देते हुए परमहंस स्वामी शारदानंद जी महाराज ने कहा कि भारतवर्ष के विभिन्न प्रांतों शहरों में यज्ञ अनुष्ठान कराना व यज्ञ के द्वारा प्राप्त होने वाले परम लाभ को भारतीय जनजीवन में बांटना ही  दैवी संपद मंडल की सहज प्रकृति है. यज्ञ विधान प्रकृति के समस्त विधानों में सर्वश्रेष्ठ विधान है जीव की सामान्य प्रकृति प्राप्त करने की होती है, जबकि यज्ञ विधान हमें देना सिखाता है। पहले हमें देना सीखना चाहिए उसके बाद हम लेने के अधिकारी बनते हैं. पूरा काल में नित्य होम नैमित्तिक होम तथा बड़े-बड़े यज्ञ विधानों का अनुष्ठान प्रायः होता था किंतु आज कलयुग के प्रभाव के कारण यज्ञ संस्कृति लुप्त होती जा रही है इसलिए प्रकृति विध्वंसक हो गई है भारतवर्ष में अनावृष्टि अतिवृष्टि दोनों ही तांडव नृत्य कर रही है जबकि यज्ञ के प्रसाद व फल के रूप में हमें आवश्यकता अनुसार जल वर्षा प्राप्त होती है. आध्यात्मिक चिंतकों को यह स्वीकार करना पड़ा कि विगत वर्षो में जिस कोरोना महामारी ने संपूर्ण विश्व को हिला कर रख दिया था उसका हल भी यज्ञ विधान है. यज्ञ के द्वारा प्राप्त हवी से देवता प्रसन्न होते हैं और देवता प्रसन्न होकर प्रकृति जगत को साधन संपन्न बनाते हैं, स्वस्थता प्रदान करते है इसलिए भारतीय मनीषा को चाहिए भारत में यत्र सर्वत्र यज्ञ करने का विधान बने, पर्यावरण असंतुलित है जिसके नाम पर हजारों लाखों पेड़ों को काटा जा रहा है इस असंतुलन को यज्ञ के विधान से ठीक किया जाता है.सहस्त्र चंडी महायज्ञ के साथ श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भी किया गया था,श्रीमद् भागवत कथा मुक्ति और भुक्ति देने वाली है श्रीमद् भागवत कथा पुराण अपने आप में संपूर्ण शास्त्र है जिस के श्रवण मात्र से ही मानव जीवन का कल्याण हो जाता है इसके अलावा विभिन्न प्रांतों से विद्वान संतों का सम्मेलन भी संपन्न हुआ. 9 दिनों तक चले सहस्रचंडी महायज्ञ से नगर में धार्मिक भक्ति में वातावरण बना हुआ था. यज्ञ में भारतवर्ष के महाराज जी के शिष्यों ने एवं क्षेत्र की आम जनता ने हिस्सा लिया. यज्ञ की समाप्ति के उपरांत  व्यवस्था में लगे कार्यकर्ता सहयोगियों का दैवी संपद मंडल अंबिकापुर इकाई के द्वारा सम्मान भी किया गया। 

         

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