: राजनांदगांव के दिव्यांग सुनील कुमार को मिला सरगुजा प्रयास विद्यालय का सहारा
Admin
Fri, Jul 20, 2018
प्रवेश गोयल
अम्बिकापुर/सूरजपुर- दृष्टि बाधा और गरीबी जैसी परिस्थितियों से जूझकर अपनी षिक्षा को जारी रखने वाले सुनील कुमार की प्रतिभा लगन और मेहनत से निरंतर निखरती गई, जब उसने बारहवीं में गणित विषय लेकर 91 प्रतिषत अंक अर्जित किये और उसका चयन नेषनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी रायपुर के लिए हुआ तो शासन- प्रषासन की नजर भी सुनील पर पड़ी। सुनील के इस जज्बे को देखते हुए शासन स्तर पर आगे की पढ़ाई जारी रखने की दृष्टि से उसका चयन प्रयास आवासीय विद्यालय अम्बिकापुर के लिए किया गया। सुनील अब शासन के खर्चे पर आगे की पढ़ाई पुरी करेगा।
गौरतलब है कि राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र मानपुर के छोटे कस्बे औधी का सुनील कुमार बाघमारे बचपन से ही मेघावी रहा है। सुनील ने विषम पारिवारिक स्थितियों तथा शारीरिक निःषक्तता के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और अंततः उसका चयन नेषनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी रायपुर के लिए हुआ है। सुनील के एक आंख की बचपन से ही रोषनी कम थी, किन्तु उसने पूरी दृढ़ता और मनोयोग के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। उसका चयन प्रयास आवासीय विद्यालय अम्बिकापुर के लिए हुआ तथा षिक्षा सत्र 2017-18 में उसने गणित विषय से 91 प्रतिषत अंकों के साथ बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की।
सुनील के पिता मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। सुनील के परिवार में उसकी माँ और एक छोटा भाई है। परिवार की गरीबी के बावजूद सुनील ने अपनी पढ़ाई में पूरा ध्यान दिया और एक अच्छा मुकाम हासिल किया। अन्य विद्यार्थियों को भी सुनील के जज्बे से प्रेरणा लेते हुए कठिन परिस्थितयों के बावजूद अपना लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ते रहने का प्रयास करना चाहिए। सतत् परिश्रम एवं लगन से निष्चित ही सफलता प्राप्त होती है।
सुनील के पिता मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। सुनील के परिवार में उसकी माँ और एक छोटा भाई है। परिवार की गरीबी के बावजूद सुनील ने अपनी पढ़ाई में पूरा ध्यान दिया और एक अच्छा मुकाम हासिल किया। अन्य विद्यार्थियों को भी सुनील के जज्बे से प्रेरणा लेते हुए कठिन परिस्थितयों के बावजूद अपना लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ते रहने का प्रयास करना चाहिए। सतत् परिश्रम एवं लगन से निष्चित ही सफलता प्राप्त होती है।विज्ञापन
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