: विकसित कृषि संकल्प अभियान शिविर में किसानों को मृदा परीक्षण के लिए किया जा रहा है प्रेरित...
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Tue, Jun 10, 2025सौरभ द्विवेदी
सूरजपुर. जिले के समस्त विकास खंडों में 29 मई से 12 जून 2025 तक विकसित कृषि संकल्प अभियान का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में किसानों को मृदा स्वास्थ्य पत्रक का वितरण किया जा रहा है, साथ ही किसानों को मृदा स्वास्थ्य पत्रक की विस्तृत जानकारी दी जा रही है जिसमें मिट्टी का क्या महत्व है, मृदा के स्वास्थ्य में गिरावट के कारण जैसे की एक ही फसल को उसी खेत में बार-बार उगाना, पैरा (फसल अवशेष) को जलाना, मृदा कटाव, असंतुलित उर्वरक का उपयोग करना, जरूर से ज्यादा जुताई करना आदि। सॉइल हेल्थ कार्ड के बारे में की यह मिट्टी की जांच के बाद बनाया गया रिपोर्ट है, जिसमें किसान के खेत में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी दिया जाता है। इस कार्ड में 10 प्रकार पोषक तत्व-कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, आयरन, जिंक, बोरोन, कॉपर, मैंगनीज एवं 2 रासायनिक गुण-पी. एच. विद्युत चालकता इस प्रकार कुल 12 पैरामीटर की जानकारी रहती है तथा परीक्षण परिणाम के आधार पर पर चयनित फसल में संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के तहत कितनी मात्रा में कंपोस्ट, गोबर खाद, यूरिया, डीएपी सिंगल सुपर फास्फेट, पोटाश की सिफारिश की जाती है। मिट्टी परीक्षण के लाभ जैसे-फसल के जरूरत के हिसाब से संतुलित खाद का उपयोग करने से फसल की उपज बढ़ती है, उत्पादन लागत कम लगती है इस प्रकार किसान की आय में वृद्धि होती है साथ ही मिट्टी का स्वास्थ्य भी स्थिर रहता है। किसान मिट्टी परीक्षण कैसे करा सकते हैं, मिट्टी परीक्षण कराने हेतु खेत से कैसे नमूना तैयार करें नमूना तैयार करने के समय का क्या-क्या सावधानी रखें से नमूना संग्रहण करने एवं परीक्षण कराने हेतु ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सहयोग ले सकते हैं। किसानों के मिट्टी का परीक्षण कृषि विभाग द्वारा निःशुल्क किया जाता है। मिट्टी के स्वास्थ्य को स्थिर, टिकाऊ बनाये रखने के लिए हमें कौन-कौन से उपाय करने होंगे, कैसे हम संतुलित खाद का उपयोग करें, कैसे हम गोबर खाद से केंचुआ खाद घर पर बनायें, मिट्टी में पोषक तत्व को बढ़ाने के लिए कैसे हरी खाद की फसलें ढँचा, सनई, लोबिया, मूंग, चरोटा आदि उगाये। धान के खेत में कैसे अजोला, नील हरित काई का उपयोग करें। विभिन्न फसलों में कौन-कौन से जैव उर्वरक का उपयोग करें, कैसे प्राकृतिक खेती जैविक खेती अपना करके मिट्टी के स्वास्थ्य को ठीक रख सकते हैं। मृदा स्वास्थ्य ठीक रखने से कैसे पशु स्वास्थ्य एवं मानव स्वास्थ्य रह सकता है के संबंध में भी किसानों को बताया जा रहा है। विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में शिविरों का आयोजन दो पालियों में किया गया। इन शिविरों का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक कृषि पद्धतियों से अवगत कराना, उनकी समस्याओं का समाधान करना और नवीन तकनीकों के प्रति जागरूक करना रहा।
पूर्वान्ह में तीन स्थानों पर लगे शिविर
प्रातःकालीन सत्र में सोनगरा, चुनगढी और कृष्णपुर में शिविर आयोजित किए गए। सोनगरा शिविर में सोनगरा, बंशीपुर, कोंरधा, शंकरपुर, श्यामपुर, सकलपुर और जरही ग्रामों के कृषक शामिल हुए। चुनगढी शिविर में चुनगढी, खोपा, करकोली, नया मलगा ग्रामों के किसान पहुंचे और कृष्णपुर शिविर में परसापरा, बरौल, भरवामुडा, उमेशपुर एवं अगस्तपुर ग्रामों के कृषक शामिल हुए।
अपरांह में आयोजित हुए तीन और शिविर
दोपहर के सत्र में खडगंवाकला, सुदामानगर और चंदरपुर में शिविर लगाए गए। खडगवांकला शिविर में चंदरपुर, मायापुर, बोझा, सुखदेवपुर, पण्डारीडांड, झींगादोहर के किसान उपस्थित रहे। सुदामानगर शिविर में सुदामानगर, सोनपुर, राजकिशोरनगर, करशु बुंदिया, धरमपुर ग्राम शामिल थे। चंदरपुर शिविर में चंदरपुर,गोपीपुर, तेलसरा, सोनपुर, पंपापुर कोट, आमगांव ग्रामों के किसान पहुंचे। इन शिविरों में विभागीय विशेषज्ञों से मिली महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य विभाग के अधिकारियों के साथ कृषि वैज्ञानिक, कृषि सखी, कृषक मित्र, पशु सखी तथा प्रगतिशील कृषकों ने किसानों को मार्गदर्शन दिया। किसानों को मिलेट्स (मोटे अनाज) की खेती, फसल चक्र परिवर्तन, प्राकृतिक और जैविक खेती, उन्नत बीज और कृषि यंत्रों का उपयोग, जल संरक्षण, मूल्य संवर्धन, पशुपालन और उद्यानिकी से जुड़ी अत्यंत उपयोगी जानकारी दी गई।
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