: कलेक्टर की खुली आंख तो मच गया स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प, जांच टीम ने छापामार कर स्वास्थ्य महकमे की पांच अलमारियों व अन्य दस्तावेजों को किया सील, विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया में लेन-देन की शिकायत पर कलेक्टर की कार्रवाई
Admin
Wed, Sep 26, 2018
प्रवेश गोयल
सूरजपुर- जिला चिकित्सालय में एएनएम एवं बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के स्वीकृत 132 पदों के मुकाबले 200 से भी अधिक लोगों की नियुक्ति कर देने के बाद सुर्खियों में आई नियुक्ति प्रक्रिया की जांच काफी हो-हल्ला के बाद भी शुरू नहीं हो पाई थी इसी दौरान स्वीकृत विभिन्न 235 पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई और इस भर्ती प्रक्रिया में लेन-देन का मामला भी सुर्खियों में आ गया जिसकी शिकायत पत्रकारों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से की थी। मामले में गंभीरता दिखाते हुए जिले के कलेक्टर केसी देव सेनापति ने संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया की जांच हेतु 5 सदस्यीय टीम का गठन किया और इस टीम ने जिला चिकित्सालय में छापा मारकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के साथ भर्ती प्रक्रिया के घोटाले को लेकर सुर्खियों में आए सहायक ग्रेड 2 के कार्यालय में पहुंच दस्तावेजों से भरी पांच अलमारी को सील कर दिया, इस दौरान अलमारी और टेबल में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी हाथ लगे हैं।
गौरतलब है कि जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एसपी वैश्य और उनके चहेते सहायक ग्रेड 2 जेम्स बेक ने सूरजपुर जिला चिकित्सालय में स्वीकृत 132 पदों के मुकाबले 200 से भी अधिक लोगों की नियुक्तियां लेनदेन करके कर दी थी इस मुद्दे को लेकर विभिन्न संगठनों और आवेदकों ने खूब हो-हल्ला मचाया लेकिन प्रशासनिक एवं राजनीतिक पहुंच रखने वाले इन अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हो पाई तो गत 19-20 सितंबर को जब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की पत्रकार वार्ता के दौरान जिले के मीडिया कर्मियों ने भर्ती प्रक्रिया में व्यापक पैमाने पर धांधली किये जाने की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी जिस पर मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए थे जिले के कलेक्टर केसी देव सेनापति ने मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप डिप्टी कलेक्टर रवि सिंह के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम गठित की और टीम में सहायक आयुक्त डॉ ललित शुक्ला, नायब तहसीलदार अमृता सिंह, अधीक्षक कलेक्ट्रोरेट विनय कुमार सरकार व जिला कोषालय अधिकारी गजानंद पटेल बतैर सदस्य शामिल किये गये। जांच टीम ने एसडीएम डॉ सुभाष सिंह राज की उपस्थिति में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के दफ्तर में दबिश देकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एस पी वैष्य और भर्ती प्रक्रिया को अंजाम देने वाले सहायक ग्रेड 2 जेम्स बेक के कार्यालय में भर्ती प्रक्रिया पर आधारित और संभावित सभी अलमारी को सील कर दिया इस दौरान उनके कार्यालय से कई संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद हुए हैं लगभग 2 घंटे तक छापामार कार्रवाई की गई।
कलेक्टर को गुमराह कर ली 86 संविदा पदों की अनुशंसा
पड़ोसी जिला कोरिया में भर्ती घोटाले के कारण फरारी काटने के बाद सूरजपुर पहुंचे सहायक ग्रेड 2 जेम्स बेक ने सूरजपुर जिले में कदम रखते ही घोटालों को अंजाम देना शुरू कर दिया एएनएम और बहुउद्देषीय कार्यकर्ता के स्वीकृत 132 पद के लिए जारी विज्ञापन के मुकाबले उन्होंने सीएचएमओ व कलेक्टर को अंधेरे में रखकर 206 लोगों की नियुक्ति कर डाली। जब यह राज परत दर परत खुलने लगा तो शेष 74 लोगों का समायोजन संविदा स्वास्थ्य कर्यकर्ता के पद पर करने के लिए पत्राचार शुरू कर दिया और कलेक्टर को गुमराह कर महिला संवर्ग के लिए 42 पद और पुरूष संवर्ग के लिए 44 पदों समेत कुल 86 पदों की संविदा नियुक्ति की अनुषंसा प्राप्त कर ली। इतना ही नहीं 11 सितम्बर को जारी विज्ञापन के तहत वार्ड आया, चौकीदार, ड्रेसर, सहायक ग्रेड 3, वाहन चालक, स्वीपर, भृत्य, कुक समेत विभिन्न 14 प्रकार के पदो ंकी 149 सीटों की भर्ती प्रक्रिया भी सुर्खियों में आ गई। कुल 235 सीटों के लिए चल रही भर्ती प्रक्रिया में समय पूर्व आवेदन जमा करने की प्रक्रिया बंद कर देने से आवेदकों ने कलेक्टर से षिकायत भी की थी और जब मीडियाकर्मियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष इस मुद्दे को रखा तो जिला चिकित्सालय मामले में आंख बंद रखने वाले कलेक्टर केसी देवसेनापति की भी आंखे खुल गई और उन्हांने जांच गठित कर निष्पक्ष जांच शुरू कर दी।
इस संबंध में जांच टीम के अध्यक्ष डिप्टी कलेक्टर रवि सिंह ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता की षिकायत पर कलेक्टर केसी देवसेनापति ने पांच सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है, जांच टीम में सहायक आयुक्त डॉ ललित शुक्ला, नायब तहसीलदार अमृता सिंह, अधीक्षक कलेक्ट्रोरेट विनय कुमार सरकार व जिला कोषालय अधिकारी गजानंद पटेल बतैर सदस्य शामिल किये गये हैं। टीम के द्वारा जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के प्रषासनिक कार्यालय में दबिष दी और आरोपी लिपिक जेम्स बेक और सीएचएमओ डॉ एसपी वैष्य के कार्यालयीन अलमारियां व संदिग्ध दस्तावेजों को सील कर दिया गया है। संबंधित मामले में संदिग्ध कुछ लोगों से पूछताछ की गई है और दस्तावेजों का परीक्षण करने के उपरांत जांच रिपोर्ट कलेक्टर को प्रस्तुत की जायेगी। बताया जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज प्राप्त हुए हैं जो काफी संदिग्ध है और घोटाले की ओर इशारा करते हैं।
गौरतलब है कि जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एसपी वैश्य और उनके चहेते सहायक ग्रेड 2 जेम्स बेक ने सूरजपुर जिला चिकित्सालय में स्वीकृत 132 पदों के मुकाबले 200 से भी अधिक लोगों की नियुक्तियां लेनदेन करके कर दी थी इस मुद्दे को लेकर विभिन्न संगठनों और आवेदकों ने खूब हो-हल्ला मचाया लेकिन प्रशासनिक एवं राजनीतिक पहुंच रखने वाले इन अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हो पाई तो गत 19-20 सितंबर को जब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की पत्रकार वार्ता के दौरान जिले के मीडिया कर्मियों ने भर्ती प्रक्रिया में व्यापक पैमाने पर धांधली किये जाने की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी जिस पर मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए थे जिले के कलेक्टर केसी देव सेनापति ने मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप डिप्टी कलेक्टर रवि सिंह के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम गठित की और टीम में सहायक आयुक्त डॉ ललित शुक्ला, नायब तहसीलदार अमृता सिंह, अधीक्षक कलेक्ट्रोरेट विनय कुमार सरकार व जिला कोषालय अधिकारी गजानंद पटेल बतैर सदस्य शामिल किये गये। जांच टीम ने एसडीएम डॉ सुभाष सिंह राज की उपस्थिति में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के दफ्तर में दबिश देकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एस पी वैष्य और भर्ती प्रक्रिया को अंजाम देने वाले सहायक ग्रेड 2 जेम्स बेक के कार्यालय में भर्ती प्रक्रिया पर आधारित और संभावित सभी अलमारी को सील कर दिया इस दौरान उनके कार्यालय से कई संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद हुए हैं लगभग 2 घंटे तक छापामार कार्रवाई की गई।
कलेक्टर को गुमराह कर ली 86 संविदा पदों की अनुशंसा
पड़ोसी जिला कोरिया में भर्ती घोटाले के कारण फरारी काटने के बाद सूरजपुर पहुंचे सहायक ग्रेड 2 जेम्स बेक ने सूरजपुर जिले में कदम रखते ही घोटालों को अंजाम देना शुरू कर दिया एएनएम और बहुउद्देषीय कार्यकर्ता के स्वीकृत 132 पद के लिए जारी विज्ञापन के मुकाबले उन्होंने सीएचएमओ व कलेक्टर को अंधेरे में रखकर 206 लोगों की नियुक्ति कर डाली। जब यह राज परत दर परत खुलने लगा तो शेष 74 लोगों का समायोजन संविदा स्वास्थ्य कर्यकर्ता के पद पर करने के लिए पत्राचार शुरू कर दिया और कलेक्टर को गुमराह कर महिला संवर्ग के लिए 42 पद और पुरूष संवर्ग के लिए 44 पदों समेत कुल 86 पदों की संविदा नियुक्ति की अनुषंसा प्राप्त कर ली। इतना ही नहीं 11 सितम्बर को जारी विज्ञापन के तहत वार्ड आया, चौकीदार, ड्रेसर, सहायक ग्रेड 3, वाहन चालक, स्वीपर, भृत्य, कुक समेत विभिन्न 14 प्रकार के पदो ंकी 149 सीटों की भर्ती प्रक्रिया भी सुर्खियों में आ गई। कुल 235 सीटों के लिए चल रही भर्ती प्रक्रिया में समय पूर्व आवेदन जमा करने की प्रक्रिया बंद कर देने से आवेदकों ने कलेक्टर से षिकायत भी की थी और जब मीडियाकर्मियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष इस मुद्दे को रखा तो जिला चिकित्सालय मामले में आंख बंद रखने वाले कलेक्टर केसी देवसेनापति की भी आंखे खुल गई और उन्हांने जांच गठित कर निष्पक्ष जांच शुरू कर दी।
इस संबंध में जांच टीम के अध्यक्ष डिप्टी कलेक्टर रवि सिंह ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता की षिकायत पर कलेक्टर केसी देवसेनापति ने पांच सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है, जांच टीम में सहायक आयुक्त डॉ ललित शुक्ला, नायब तहसीलदार अमृता सिंह, अधीक्षक कलेक्ट्रोरेट विनय कुमार सरकार व जिला कोषालय अधिकारी गजानंद पटेल बतैर सदस्य शामिल किये गये हैं। टीम के द्वारा जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के प्रषासनिक कार्यालय में दबिष दी और आरोपी लिपिक जेम्स बेक और सीएचएमओ डॉ एसपी वैष्य के कार्यालयीन अलमारियां व संदिग्ध दस्तावेजों को सील कर दिया गया है। संबंधित मामले में संदिग्ध कुछ लोगों से पूछताछ की गई है और दस्तावेजों का परीक्षण करने के उपरांत जांच रिपोर्ट कलेक्टर को प्रस्तुत की जायेगी। बताया जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज प्राप्त हुए हैं जो काफी संदिग्ध है और घोटाले की ओर इशारा करते हैं।विज्ञापन
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