प्यास का पहाड़ : बैजनपाठ में सोलर पंप फेल, बूंद-बूंद पानी के लिए सीमा पार जा रहे आदिवासी...
Rajesh Soni
Mon, May 11, 2026
सूरजपुर। एक ओर सरकार आदिवासी क्षेत्रों में 'हर घर जल' का दावा कर रही है, वहीं जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में हकीकत इसके उलट है। ग्राम पंचायत खोहीर के आश्रित ग्राम बैजनपाठ में पिछले दो सप्ताह से सोलर ड्यूल पंप खराब पड़ा है। भीषण गर्मी के बीच यहाँ के पंडो और गोंड जनजाति के परिवार पानी की एक-एक बूंद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
पुरानी त्रासदी ने फिर दी दस्तक...
बैजनपाठ की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ पानी हमेशा से एक चुनौती रहा है। पूर्व में हालात इतने खराब थे कि ग्रामीणों को पानी के लिए पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश की सीमा तक जाना पड़ता था। लंबी लड़ाई और मीडिया में खबरें आने के बाद प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च कर यहाँ सोलर ड्यूल पंप लगवाया था। कुछ समय तो राहत मिली, लेकिन अब तकनीकी खराबी ने ग्रामीणों को फिर से उसी पुराने और कष्टकारी दौर में धकेल दिया है।
विभागों की चुप्पी: 'प्यास' पर भारी पड़ रही 'सुस्ती'
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि उन्होंने क्रेडा (CREDA) और पीएचई (PHE) विभाग को कई बार सूचना दी, लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। न तो विभाग का कोई तकनीकी कर्मचारी मौके पर पहुँचा और न ही मरम्मत की कोई पहल की गई। विभागीय उपेक्षा के कारण अब महिलाएं और मासूम बच्चे तपती धूप में मीलों दूर से पानी ढोने को विवश हैं।
विशेष संरक्षित जनजाति के सामने जीवन का संकट
विशेष पिछड़ी जनजाति पंडो और गोंड परिवारों के लिए यह पेयजल संकट अब जीवन-मरण का सवाल बन गया है। आर्थिक रूप से कमजोर इन परिवारों का कहना है कि सरकार के विकास के दावे कागजों तक ही सीमित हैं। ग्रामीणों ने सूरजपुर की नवपदस्थ कलेक्टर से मार्मिक अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और तत्काल मरम्मत करवाकर इस "जल-वनवास" को समाप्त करें।
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