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: कभी जलाया उस रावण को.. क्यों नहीं जलाया.?

Admin

Wed, Oct 5, 2022

बात बेबाक
चंद्र शेखर शर्मा

हर बार की तरह बार भी देवी आराधना का पर्व व खप्पर यात्रा हर्षोउल्लास के साथ सम्पन्न हो गया आज माता सीता का हरण करने वाले रावण (पुतले ) का दहन भी हो ही जायेगा पर क्या हमारे सभ्य समाज में हमारी आपकी अपनी पत्नी, बेटी, बहन और मां का जो रोज हरण होता है पब्लिक ट्रांसपोर्ट में, फुटपाथ पर और सड़कों पर, दफ्तरों, बाजारों ,स्कूल कालेज  में कभी  देखा उस रावण को ? नहीं दिखा ना ? कभी जलाया उस रावण को ? क्यों नहीं जलाया भाई ?  सोचो क्या हमारे आपके अंदर बैठे रावण को कभी थोड़ी सी भी आंच आई ? फिर भी इस बरस का रावण अपने पुतले का दहन करवा कर फिर किसी ना किसी रूप में हममें आपमे इसमें उसमें रुक ही जाएगा फिर अगले बरस दशहरे में नई सजावट साजसज्जा और आतिशबाजी के साथ जलने को ।

और अंत मे :-
न बोलने की मनाही न कोई दुश्वारी,
ज़बाँ सभी को मयस्सर है और सब चुप हैं ।
क़ुसूर-वार हूँ इतना कि चश्म-दीद था मैं,
और अब गुनाह मिरे सर है और सब चुप हैं ।।

पुनः किसी न किसी रूप में सबके अंदर छुपे रावण के नाश की उम्मीद और आशा के साथ असत्य पर सत्य के जीत के पर्व दशहरे की हार्दिक मंगलकामनाऐं ..

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