पटवारी हड़ताल : खेतों में लहलहा रही धान की फसल, ऑनलाइन रिकॉर्ड में रकबा शून्य, पटवारी हड़ताल से किसानों पर गहराया संकट
Subhas Gupta
Tue, Oct 27, 2026
सहकारी बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों की बढ़ी चिंता; समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन से वंचित होने की आशंका
कलेक्टर से चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में विशेष राजस्व शिविर लगाकर तत्काल गिरदावली सुधार कराने की मांग
सूरजपुर। राजस्व पटवारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर अंचल में गिरदावली रिकॉर्ड की बड़ी खामियां उजागर हुई हैं। क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में सैकड़ों किसानों के खेतों में धान की भरपूर फसल खड़ी है, लेकिन सरकारी पोर्टल पर दर्ज डिजिटल गिरदावली में उनका रकबा शून्य (जीरो) प्रदर्शित हो रहा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तारीख नजदीक आते ही इस विसंगति ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
13 अक्टूबर से कलमबंद हड़ताल, गांवों में ठप हुआ राजस्व कार्य
अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राजस्व पटवारी संघ 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। इसके चलते जमीनी स्तर पर त्रुटि सुधार और सत्यापन का पूरा प्रशासनिक ढांचा ठप पड़ गया है। चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के ग्राम महुली, खोहीर, बैजनपाठ, लूल्ह, रामगढ़, जुड़वानिया, कोल्हुआ, चोंगा, कछवारी और करौटी सहित आसपास के गांवों में गिरदावली में व्यापक त्रुटियां सामने आई हैं। कई किसानों के खातों में धान की जगह अन्य फसलें दर्ज कर दी गई हैं, तो कई खातों से फसल विवरण ही पूरी तरह गायब है।
कर्ज तले दबे किसानों के सामने आजीविका की चुनौती
इस विसंगति का सबसे गंभीर असर उन किसानों पर पड़ रहा है, जिन्होंने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से खाद-बीज और खेती के लिए कृषि साख ऋण (केसीसी) लिया है। किसानों को आशंका है कि यदि पोर्टल पर रकबा शून्य रहा, तो वे समर्थन मूल्य पर अपनी उपज नहीं बेच पाएंगे। ऐसी स्थिति में उन्हें न केवल खुले बाजार में औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर होना पड़ेगा, बल्कि बैंक का ऋण चुकाना भी नामुमकिन हो जाएगा।
विशेष शिविर आयोजित कर भौतिक सत्यापन की मांग
दूरस्थ वनांचल के प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। ग्रामीणों की मांग है कि
चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के प्रभावित ग्रामों में तत्काल विशेष राजस्व शिविर आयोजित किए जाएं।
वैकल्पिक राजस्व अमले की तैनाती कर खेतों में खड़ी वास्तविक फसल का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
समर्थन मूल्य पंजीयन की अंतिम तिथि से पूर्व ऑनलाइन पोर्टल पर रकबे की प्रविष्टि दुरुस्त की जाए।
किसानों का कहना है कि धान खरीदी शुरू होने में बेहद कम समय बचा है यदि प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेकर सुधार नहीं कराया, तो सैकड़ों किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य के लाभ से वंचित रह जाएंगे।
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