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: भूपेश सरकार के खिलाफ पत्रकारों का फूटा गुस्सा.....जमकर हुई नारेबाजी......आमरण अनशन पर बैठे कमल शुक्ला....कार्रवाई की मांग....

Admin

Sun, Oct 4, 2020

राजेश सोनी
रायपुर- कांकेर में वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला और सतीश यादव के साथ हुई मारपीट में आरोपियों व संरक्षण देने वालो पर एक हफ्ते गुजरने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर पत्रकारों का गुस्सा दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहा है। रायपुर में सरकार के उदासीनता से नाराज पत्रकार, गांधी जयंती पर प्रदर्शन के बाद पत्रकार कमल शुक्ला बूढ़ा तालाब धरना स्थल पर अपने साथियों के साथ आमरण अनशन पर बैठ गए है। कांकेर के वरिष्ठ पत्रकार सुशील शर्मा बताते हैं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सत्ता में आने से पहले पत्रकार हितैषी बनती थी और अब सरकार बनने के बाद जब पत्रकारों पर उनकी ही पार्टी के लोग दिनदहाड़े सरेराह हमला कर रहे है तो कार्यवाही नही कर रही है। सरकार के इस कृत्य के बाद उनके दोहरे चरित्र का खुलासा हो गया है। हम पत्रकार सिर्फ इतना चाहते हैं कि कांकेर जिले में जो पत्रकारो के साथ हुआ है, उसपर सरकार तुरंत संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्यवाही करें और प्रदेश में फिर कभी कही भी इस तरह का कृत्य नहीं हो जिसके लिए कानून का डर सभी अपराधिक तत्व पर बना रहे हैं।

क्या था विवाद
पत्रकार कमल शुक्ला बताते हैं कि सीएम सलाहकार राजेश तिवारी के संरक्षण में रेत माफियाओं का राज चल रहा है। कांकेर के कुछ पत्रकार इसके खिलाफ लगातार लिख रहे थे, जिसमें सतीश यादव और मैं शामिल था। मुझे कई बार नहीं लिखने के एवज में रूपये की पेशकश की, संवाद के लिए गाड़ियाँ भेजी गई। लेकिन, मैंने इंकार कर दिया। जिसके बाद 26 सितंबर को चायदुकान में अपने मित्रों के साथ चाय पी रहे पत्रकार सतीश यादव को मारते हुए थाने ले जाया गया, इसकी सूचना पर जब हम पत्रकार थाने पहुंचे तो हमारे साथ गुंडागर्दी करते हुए असामाजिक लोगो द्वारा हमला किया गया वो भी पुलिस थाना परिसर में पुलिस वालों के सामने ही, हम पर पिस्टल भी ताना गया।

हमलावर कौन है
सतीश बताते हैं कि हम पर हमला करने वाले पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जितेन्द्र ठाकुर, कांग्रेसी पार्षद शदाब खान, गणेश तिवारी राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस, गफ्फार मेमन विधायक प्रतिनिधि और जिला कांग्रेस में महामंत्री, मकबूल खान उपाध्यक्ष नप, बंटी शर्मा, नीरज शर्मा, प्रदीप भट्ट, मुनिद अहमद, जावेद खान, आर्यन मसीह, सोमेश सोनी और अन्य लोग शामिल थे।

अब तक क्या हुआ

मारपीट के बाद पुलिस ने पत्रकारों के दबाव पर 4 आरोपियों की गिरफ़्तारी की, लेकिन मामूली धाराएं लगाकार तुरंत ही थाने से छोड़ दिया गया जिसके बाद एक होटल में आरोपियों का जश्न के दौरान का एक ऑडियो भी वायरल हुआ जिसमें सुनियोजित साजिश की बात स्पष्ट है। अगले दिन प्रदेशभर के पत्रकारों ने कांकेर में प्रदर्शन किया तो कांग्रेस सरकार ने अपने चार विधायकों का एक दल बनाकर कांकेर भेजा था जिसने पत्रकारो पर मामले में माफ़ी मंगवाने के नाम पर दबाने को कहा ऐसा भी स्थानीय पत्रकारो ने आरोप लगाया है साथ ही पत्रकारो द्वारा इंकार कर कार्यवाही की बात की तो राजधानी में सरकार ने अपना चाल शुरू कर दिया। राजधानी के कुछ पत्रकारों को अपने साथ लेकर सरकार 2 अक्टूबर को प्रदर्शन में शामिल होने आने वाले पत्रकारों को दिग्भ्रमित किया गया। इसके बावजूद राजधानी रायपुर में उम्मीद से ज्यादा पत्रकार पहुंच कर गांधी मैदान से मुख्यमंत्री निवास को निकले थे जिसे पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया था और शाम तक सरकार के तरफ से कोई भी पत्रकारो से मिलने नही आया जिससे नाराज पत्रकारो ने ज्ञापन को जलाकर विरोध जताते हुए आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया और वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला ने आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा की और अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए है जिसमें हर दिन हर जिले से पत्रकार आकर शामिल होंगे जबतक सरकार आरोपियों व संरक्षण देने वालो पर कार्रवाई नही करती।

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