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डिजिटल इंडिया के दावों को ठेंगा : 2 साल से शोपीस बने हैं करोड़ों के BSNL टावर

Rajesh Soni

Fri, Jun 19, 2026

सूरजपुर। एक ओर जहां देश में 4G और 5G नेटवर्क के तेजी से विस्तार और 'डिजिटल इंडिया' के दावे किए जा रहे हैं, वहीं सूरजपुर जिले का दूरस्थ पहाड़ी अंचल चांदनी-बिहारपुर आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहा है। क्षेत्र के तेलाईपाठ, उमझर और रसोकी सहित लगभग एक दर्जन गांवों में BSNL द्वारा दो वर्ष पूर्व करोड़ों की लागत से मोबाइल टावर स्थापित किए गए थे, जो आज तक चालू नहीं हो सके हैं। यह लापरवाही प्रशासनिक उपेक्षा और अधूरे विकास की कहानी बयां कर रही है। नेटवर्क न होने के कारण आपातकालीन स्थिति में ग्रामीण 108 (संजीवनी एंबुलेंस) और 102 (महतारी एक्सप्रेस) सेवाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। मरीज की तबीयत बिगड़ने या प्रसव पीड़ा के समय परिजनों को सिग्नल खोजने के लिए पहाड़ियों या गांव से बाहर दौड़ना पड़ता है। बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, आधार से संबंधी कार्य, किसान पंजीयन और आयुष्मान कार्ड जैसी डिजिटल और ऑनलाइन आधारित सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हैं।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के दावों के बीच, नेटवर्क के अभाव में उचित मूल्य दुकानों से आज भी राशन का वितरण ऑफलाइन किया जा रहा है। स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति, विभागीय पोर्टल अपडेट और अन्य शासकीय रिपोर्टिंग के लिए कर्मचारियों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जिससे समय और संसाधन दोनों की बर्बादी हो रही है। बरसात के मौसम में जब इन गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट जाता है, तब नेटवर्क न होने से किसी दुर्घटना या आपात स्थिति की सूचना प्रशासन तक नहीं पहुंच पाती।​खोहिर, कछवारी, जूड़वनिया, रामगढ़ और कोल्हूआ सहित दर्जनों गांवों के नागरिकों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि "जब सेवा शुरू ही नहीं करनी थी, तो जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये खर्च कर ये टावर क्यों खड़े किए गए?" ​क्षेत्रवासियों ने दूरसंचार विभाग और जिला प्रशासन से इन निष्क्रीय टावरों को तत्काल चालू करने की मांग की है ताकि ग्रामीणों को नेटवर्क विहीन जीवन से मुक्ति मिल सके।

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