व्यवस्था की सच्चाई : सड़क पर खून, अस्पताल में ताला, घायल युवक को घंटों नहीं मिला इलाज, ग्रामीणों ने बाइक से पहुंचाया अस्पताल.
Pappu Jayswal
Mon, Apr 13, 2026
चांदनी बिहारपुर. सत्ता में बैठे नेता मंत्री की बड़ी बड़ी दावों के बीच इनकी जमीनी हकीकत आ ही जाते है। कुछ ऐसा ही देखा गया। जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र चांदनी बिहारपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत महूली में आज दोपहर करीब 1 बजे हुई एक सड़क दुर्घटना ने न सिर्फ तीन लोगों को घायल किया, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की बदहाली को उजागर कर दिया। बैजनपाठ निवासी भगवन सिंह पिता – लक्ष्मण सिंह अपने साथियों लकपती सिंह पिता – रघुनाथ सिंह एवं जगबली सिंह पिता – जगनराम के साथ बाइक से महूली आए थे। वापसी के दौरान बाजार के पास ही उनकी बाइक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में चालक भगवन सिंह को गंभीर चोटें आईं, जबकि दोनों अन्य सवार भी घायल हो गए।
इलाज के इंतजार में तड़पती रही जिंदगी
दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीण मानवता का परिचय देते हुए घायलों को महूली उप स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन वहां का दृश्य चौंकाने वाला था,अस्पताल में ताला लटका हुआ था। गंभीर रूप से घायल भगवन सिंह दर्द से कराहता रहा, लेकिन इलाज के लिए कोई डॉक्टर, कोई स्टाफ मौजूद नहीं था। ग्रामीणों के अनुसार, यह कोई पहली घटना नहीं है। उप स्वास्थ्य केंद्र में अक्सर ताला लगा रहता है, जिससे मरीजों को हर बार निराश होकर लौटना पड़ता है।
108 सेवा भी बनी मजाक, कॉल उठाकर काटा गया फोन
घटना के बाद 108 एंबुलेंस सेवा को कई बार कॉल किया गया, लेकिन आरोप है कि कॉल रिसीव करने के बाद नेटवर्क समस्या का हवाला देकर बार-बार फोन काट दिया गया। इस लापरवाही ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। घंटों इंतजार के बाद भी जब एंबुलेंस नहीं पहुंची, तो मजबूर होकर ग्रामीणों ने घायल को बाइक के जरिए ही अस्पताल के लिए रवाना किया। बिहारपुर अस्पताल प्रभारी को जानकारी देने के घंटों बाद मौके पर एंबुलेंस पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए है क्या उप स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ कागजों में चल रहे हैं? क्या आपातकालीन सेवाएं केवल नाम मात्र रह गई हैं? ग्रामीण इलाकों में लोगों की जान की कोई कीमत नहीं?
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है “अगर समय पर डॉक्टर और एंबुलेंस मिल जाती, तो घायल की हालत इतनी गंभीर नहीं होती। हर बार यही स्थिति रहती है, अब प्रशासन को जवाब देना होगा।”
बार-बार उजागर हो रही लापरवाही
महूली उप स्वास्थ्य केंद्र में ताला लटकना अब आम बात बन चुकी है। यहां 15–20 गांवों के लोग इलाज के लिए निर्भर हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं,स्टाफ नहीं,आपातकालीन सुविधा नहीं ऐसे में ग्रामीणों की जिंदगी भगवान भरोसे चल रही है। ग्रामीणों ने मांग है कि स्वास्थ्य केंद्र में नियमित डॉक्टर की नियुक्ति हो, 108 सेवा की जवाबदेही तय की जाए। महूली की यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की सच्चाई है, जहां इलाज के इंतजार में हर दिन जिंदगियां खतरे में पड़ रही हैं। जब अस्पताल बंद हो और एंबुलेंस जवाब न दे, तो आखिर ग्रामीण जाएं तो जाएं कहां?
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