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मिला था लिखित आश्वासन : सूरजपुर के 17 गांवों में 'अंधेरे' का तांडव: 6 महीने बाद भी प्रशासन के वादे ठंडे बस्ते में, 12 हजार लोग मजबूर

Rajesh Soni

Thu, Jul 2, 2026

9 दिन के ऐतिहासिक आंदोलन और मुंडन प्रदर्शन के बाद मिला था लिखित आश्वासन, लेकिन बरसात के बीच आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं वनांचल के ग्रामीण।

सूरजपुर। सूरजपुर जिले के चांदनी-बिहरपुर वनांचल क्षेत्र में विकास की रोशनी अभी भी कोसों दूर है। क्षेत्र के 17 गांवों में रहने वाले करीब 12,000 ग्रामीण आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। हैरानी की बात यह है कि छह महीने पहले बिजली की मांग को लेकर किए गए नौ दिवसीय ऐतिहासिक आंदोलन के बाद जिला प्रशासन ने जो वादे किए थे, वे आज भी केवल कागजों तक ही सीमित हैं।आश्वासन का पत्र

प्रशासनिक आश्वासन और हकीकत

​बीते कड़ाके की ठंड के दौरान, बिहरपुर तहसील में ग्रामीणों ने नौ दिनों तक धरना दिया था। इस दौरान युवाओं ने सर मुंडन कराकर और अनूठे विरोध प्रदर्शनों के जरिए शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। आंदोलन के नौवें दिन जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर आश्वासन दिया था कि ​महुली, कोल्हूआ, कछवारी, खैरा, चोगा, कछिया और नवडीहा तक विद्युत लाइन का विस्तार किया जाएगा। अन्य दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में क्रेडा (CREDA) के माध्यम से सौर ऊर्जा आधारित बिजली व्यवस्था विकसित की जाएगी।

​छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन न तो विद्युत लाइन विस्तार का कार्य धरातल पर उतरा और न ही सोलर सिस्टम की सुध ली गई।

​दो वर्षों से कबाड़ बने सोलर प्लांट

​ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में पूर्व में स्थापित दो दर्जन से अधिक सोलर पावर प्लांट, होम लाइट और इनवर्टर पिछले दो वर्षों से पूरी तरह बंद पड़े हैं। रखरखाव के अभाव में अधिकांश बैटरियां खराब हो चुकी हैं और सिस्टम केवल ढांचा बनकर रह गए हैं। वर्तमान में ग्रामीण एक बार फिर लालटेन और अन्य वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

​बरसात में बढ़ा खतरा, बदतर हुए हालात

​बिजली के अभाव ने बरसात के मौसम में ग्रामीणों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं।

सुरक्षा: रात के समय जहरीले सांप-बिच्छू और जंगली जानवरों का भय ग्रामीणों को साये की तरह डराता है।

शिक्षा और संचार: बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, वहीं मोबाइल चार्जिंग की सुविधा न होने से संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप रहती है।

आपातकाल: मरीजों को रात के समय चिकित्सा सहायता के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

​"प्रक्रिया जारी है" का रटा-रटाया जवाब

​जब भी ग्रामीण संबंधित अधिकारियों से कार्य की प्रगति के बारे में पूछते हैं, तो उन्हें केवल "प्रक्रिया जारी है" का जवाब मिलता है। धरातल पर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य की शुरुआत न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

​प्रशासन को चेतावनी

​ग्रामीणों ने कलेक्टर और छत्तीसगढ़ शासन से मांग की है कि आंदोलन के दौरान किए गए वादों को अविलंब पूरा किया जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि बिजली आपूर्ति बहाल करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए पुनः लोकतांत्रिक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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