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वन्यजीव की मौत : इलाज के अभाव में घायल लकड़बग्घे ने तोड़ा दम, वन विभाग पर लापरवाही का आरोप

Rajesh Soni

Mon, Mar 23, 2026

सूरजपुर. जिले के चांदनी बिहारपुर वन परिक्षेत्र के मकराद्वारी के पास एक लकड़बग्घा पूरे दिन तड़पता रहा और आखिरकार इलाज के अभाव में उसने दम तोड़ दिया। इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।ग्रामीणों के अनुसार, रविवार सुबह से ही लकड़बग्घा कोल्हूआ क्षेत्र के आसपास असामान्य हालत में घूमता नजर आ रहा था। उसकी हरकतें बेहद विचित्र थीं कभी वह लकड़ी को दांत से काट रहा था तो कभी पत्थरों को काटने की कोशिश कर रहा था। उसकी हालत देखकर साफ लग रहा था कि वह गंभीर रूप से बीमार या घायल है।स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी, लेकिन आरोप है कि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बताया जा रहा है कि गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के रेंजर ने पशु चिकित्सक से संपर्क किया, परंतु संबंधित डॉक्टर मध्यप्रदेश के बैढ़न में अपने गृह निवास पर थे और रविवार होने के कारण मौके पर नहीं पहुंच सके।ग्रामीणों का कहना है कि अगर वन विभाग चाहता तो वैकल्पिक व्यवस्था कर तत्काल इलाज कराया जा सकता था, लेकिन लापरवाही के चलते एक बेजुबान जानवर की जान चली गई।आखिरकार, रविवार शाम करीब 3 बजे मकराद्वारी के खीरो नदी किनारे लकड़बग्घा ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। हैरानी की बात यह रही कि वन विभाग की टीम उसकी मौत के बाद मौके पर पहुंची और केवल औपचारिकताएं पूरी करते हुए पंचनामा बनाकर शव को वन कार्यालय बिहारपुर ले जाया गया। वन विभाग के अनुसार आज जिला स्तरीय पशु चिकित्सक द्वारा पोस्टमार्टम किया जाएगा, जिसके बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।बिहारपुर वन परिक्षेत्र में वन्यजीवों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। करीब एक माह पहले महूली क्षेत्र में एक तेंदुआ कुएं में गिरने से मारा गया था और अब लकड़बग्घा की मौत ने वन विभाग की लापरवाही को एक बार फिर उजागर कर दिया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दिनों जंगलों में भीषण आग लगी हुई है, जिसके कारण वन्यजीव अपने सुरक्षित ठिकानों को छोड़कर गांवों की ओर भाग रहे हैं। इसी वजह से वे घायल हो रहे हैं और समय पर इलाज नहीं मिलने से उनकी मौत हो रही है।

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