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: जिले में शिक्षा विभाग का हाल बेहाल...

Admin

Wed, Sep 6, 2023

सूरजपुर।जिले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का हाल सैंया भये कोतवाल तो.......जैसा है।ऐसे में जब किसी का अंकुश न हो तो फिर मनमानी व भृष्ट कार्यशैली का आलम क्या होगा इसका अंदाज लगाया जा सकता है।शिक्षा की व्यवस्था,बच्चों का भविष्य इससे जिले के किसी अधिकारी को कोई लेना देना नही है।अधिकारी केवल अपने आकाओं की हुक्म अर्दली कर अपनी कुर्सी बचाने में मशगूल है।शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार किस हद तक फैला हुआ है, इसका अंदाजा हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश स्तर पर पदोन्नति संशोधन मामलों में की गई कार्यवाही से लगाया जा सकता है। भ्रष्टाचार के मामले में जिले का शिक्षा विभाग भी आये दिन सुर्खियों में रहता है। यहां शिक्षकों से अवकाश स्वीकृति करने से लेकर अन्य सभी छोटे - बड़े कामों को बिना चढ़ावा के कराना संभव नहीं है।  शिक्षा विभाग के अफसर छत्तीसगढ़ शासन के आदेशों और नियमों तक को  कर रहे दरकिनार कर अपनी मनमानी चला रहे हैं। जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में हाल ही में शिक्षकों की पदोन्नति पश्चात् एकल शिक्षकीय और शिक्षक विहीन माध्यमिक शालाओं में कई वर्षों के बाद शिक्षकों की पदस्थापना हुई थी, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों ने उन्हें फिर से शहर के नजदीक और उनकी मनचाही जगहों में संलग्न कर दिया है,जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी ज्यों की त्यों बनी हुई है। इस कार्य में रामानुजनगर विकासखंड के शिक्षा अधिकारी का कारनामा चर्चा में हैं। कई ऐसे स्कूलों को एकल शिक्षकीय और शिक्षक विहीन विद्यालय बताकर जिनमें पर्याप्त संख्या में शिक्षक कार्यरत हैं, वहां पदस्थ शिक्षकों को लाभ पहुंचाने के लिए उन्हें उनके मनचाहे स्थान पर संलग्न कर,यहां अन्यत्र विद्यालय के शिक्षकों को संलग्न कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा बहुतायत संख्या में शिक्षकों को उच्च परीक्षा उत्तीर्ण करने पश्चात् कार्योत्तर अनुमति आदेश जारी किये गये हैं, जबकि शासन के नियमानुसार किसी भी शासकीय सेवकों को अपनी शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने के लिए और उच्च परीक्षाओं में सम्मिलित होने के लिए विभाग से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है, इसके बावजूद भी जिले के बहुत सारे शिक्षकों ने बिना विभाग की पूर्व अनुमति के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश लेकर उच्च उपाधि प्राप्त कर कार्योत्तर अनुमति हेतु आवेदन प्रस्तुत कर शिक्षा विभाग के सक्षम अधिकारियों से अनुमति प्राप्त कर लिया है, जबकि ऐसा करने पर कड़ी कार्यवाही का स्पष्ट प्रावधान है। कार्योत्तर अनुमति सिर्फ ऐसे शासकीय सेवकों को ही दिया जा सकता है, जिन्होंने समय - सीमा में उच्च परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु कार्यालय में अनुमति हेतु आवेदन प्रस्तुत किया हैं, और किसी कारणवश अनुमति आदेश जारी नहीं किया गया हो, तो उन आवेदनों पर पावती के आधार पर विचारोंपरांत कार्योत्तर आदेश जारी किया जा सकता है। जिले के शिक्षा विभाग द्वारा बहुतायत संख्या में अनुमति हेतु पूर्व में आवेदन प्रस्तुत किये बिना ही नियमविरूद्ध तरीके से कार्योत्तर अनुमति प्रदान किया गया है...!

प्रदेश में अधिकारियों का टोंटा....?

जिला शिक्षा अधिकारी इसी जिले के निवासी ओर कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री के करीबी है।इसलिए उन्हें दो दो जिले का प्रभार मिला हुआ है।अब उक्त अधिकारी इस दो जिले में कांग्रेस को चुनाव में कितना फायदा दिला पाते है यह तो आने वाले वक्त में पता चलेगा..? इससे यह तय है कि प्रदेश में अधिकारियों का टोंटा है जिससे दो दो जिला देकर उपकृत किया जा रहा है।  ऐसे अधिकारियों के कारण जिले में शिक्षा व्यवस्था का हाल क्या है और बच्चों के भविष्य किस तरह गढ़े जा रहे है यह देखना हो तो जिले के दूरस्थ अंचल में देखा जा सकता है..?

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