रामगढ़ महोत्सव : पहली बार शामिल होंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, 29-30 जून को होगा दो दिवसीय आयोजन
Rajesh Soni
Sat, Jun 27, 2026
उदयपुर। सरगुजा जिले की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ में 29 एवं 30 जून को दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष का महोत्सव कई मायनों में विशेष रहेगा, क्योंकि पहली बार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रामगढ़ महोत्सव में शामिल होकर इसका शुभारंभ करेंगे।
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। कार्यक्रम स्थल पर विशाल वाटरप्रूफ टेंट-पंडाल तैयार किया जा रहा है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए वाहनों की पार्किंग के अलग-अलग इंतजाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर झिरमिटी स्टेडियम में बनाए जा रहे अस्थायी हेलीपैड पर उतरेगा, जहां से वे सड़क मार्ग से कार द्वारा कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे।
रामगढ़ का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व अत्यंत प्राचीन माना जाता है। मान्यता है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने रामगढ़ के घने जंगलों में छह माह से अधिक समय व्यतीत किया था। इसी दौरान श्रीराम और माता सीता ने सीता बेंगरा में रात्रि विश्राम किया था। यही कारण है कि रामगढ़ को भगवान श्रीराम के वनगमन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
रामगढ़ का साहित्यिक महत्व भी विश्व स्तर पर स्थापित है। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में शुमार सीता बेंगरा गुफा के समीप स्थित जोगीमारा गुफा में बैठकर अपने अमर महाकाव्य 'मेघदूतम्' की रचना की थी।
इसी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पिछले दो दशकों से अधिक समय से आषाढ़ मास के प्रथम दिवस (आषाढ़स्य प्रथम दिवसे) रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा है।
दो दिवसीय महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोककलाओं की आकर्षक प्रस्तुतियां, पुरातात्विक धरोहरों पर आधारित आयोजन तथा पर्यटन को बढ़ावा देने वाली विभिन्न गतिविधियां आयोजित होंगी। मुख्यमंत्री के पहली बार महोत्सव में शामिल होने से क्षेत्रवासियों में विशेष उत्साह का माहौल है।
उदयपुर क्षेत्र के लोगों को मुख्यमंत्री के आगमन से विशेष उम्मीदें भी हैं। उनका मानना है कि उदयपुर में आईटीआई, महाविद्यालय, एसडीएम कार्यालय, थाना सहित अनेक महत्वपूर्ण शासकीय संस्थान एवं आसपास दो बड़े कोयला खदान संचालित होने के बावजूद आज तक नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिल सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत का गठन नहीं होने से क्षेत्र का समुचित शहरी विकास प्रभावित हुआ है। ऐसे में मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान क्षेत्र की इस लंबे समय से चली आ रही मांग पर भी लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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