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: कायदे में रहेंगे तो फ़ायदे में रहोगे.? पत्रकारों में पड़ी फुट..घमकी चमकी से युवा पत्रकार हुए आक्रोशित...तथा कथित पत्रकार संघ हुई भंग...

Admin

Sat, Sep 10, 2022

सूरजपुर- नया जिला बनने से जिले का विकास के साथ भ्रष्टाचार,रिश्वतखोरी,काले धंधे, कोल माफिया, नशे सहित अन्य अवैध कारोबार का साम्राज्य स्थापित हो गया है. लोक तंत्र के कथित चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले पत्रकार भी गुंडे बदमाश की राह पर चल अनैतिक कारोबार में संलिप्त होकर पत्रकारिता को कलंकित कर तार तार करने में लगे हुए है. दुसरो की खबर छापने वाले कितने दूध पानी है यह अब किसी से छुपी नही, दलगत करने वाले नेता पत्रकार सत्तासुख का आनंद से आनंदितमय है तो वही पैराशूट की तरह उतरे नेता पत्रकार की सक्रियता हर कोई हतप्रद है सच का आइना दिखाने वाले नगर के पत्रकार को मुंगेरीलाल लाल के हसीन सपने दिखाये गए, होश खो बैठे कलमकार सपनो की दुनिया भ्रमण कर आये, यहाँ तक कि 5-5 डिसमिल जमीन तक दिला दिए गए. महाठग ने ठगों को ऐसा ठगा की सब सुधबुत खो बैठे. आखिरकार एक दिन हसीन सपना टूटना ही था फिर क्या रेत उत्खनन परिवहन उगाही को लेकर वरिष्ठ पत्तलकारो पर उंगली उठाई तो बवाल मच गया. पत्रकारों का मसीहा बने तथाकथित अध्यक्ष की युवा पत्रकारों ने हवा निकाल दी है. कायदे और फायदे का ज्ञान देना महंगा पड़ गया.? फिलहाल पत्रकार संघ को भंग कर दिया गया. नगर के पत्रकारों को वैकल्पित व्यवस्था के लिए पुराना जिला अस्पताल के दो कमरों को दिया गया था जिसकी मरमत की जा रही थी वह भी पैसे के अभाव में बंद है उसपर भी एकाधिकार किया जा रहा है यहाँ पर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से वर्चस्व की लड़ाई देखी जा सकती है. फ़िल्म अभिनेता नाना पाटेकर एक डायलाक एक मच्छर सबको हिजड़ा बना देती है एक मच्छर..सटीक बैठती है. बहरहाल आधुनिक युग की पत्रकारिता अब पत्तलचाटुता बन गई है. देखा तो यही जा रहा फूल,पंजा छाप पत्रकार अधिकारियों को तेल लगा कर लाभ लेने में लगे है.जिले के कलेक्टर एसपी के चरण वंदन चाटुकारिता करने से बाज नही आते, तो वही एकाध ऐसे भी पत्रकार है जो महिला बनकर महिलाओं के काम धंधा पर डाका डाल कर गौरवान्वित हो रहे जिनकी सोशल मीडिया में जमकर चर्चे है. कई ipc धाराओं से सुसज्जित ज्ञानी पत्रकार इज्जत बचाने में लगे है यहाँ लड़ाई आपस मे झिड़ी हुई है एक पत्रकार दूसरे पत्रकार को नीचा दिखाने में लगा हुआ है. कई तथाकथित अध्यक्ष बनकर पत्रकारों को मैनेज के नाम से मोटा रकम जेब मे ठूस रहे. सम्पूर्ण विवाद में वरिष्ठ पत्रकारों ने दूरी बना रखी कुछ भी कहने से बच रहे तो वही युवा पत्रकारों खुल कर विरोध कर अपनी रणनीति बनाने में लगे है जिससे वे झले ना जाये. फिलहाल पत्रकारों की आपसी लड़ाई की चर्चा जोरो पर है. तो वही पत्रकारों का रहनुमा बनने वाले की करतूतों को युवा पत्रकार सामने लाने और प्रशासनिक अधिकारियों से अवगत कराने की बात कह रहे. और अंत मे कुछ स्वंम सहायता समूह की महिलाएं बड़े नामी पत्तलकारो को सबक सिखाने के मूड में है कभी भी कुछ हो सकता.? 

क्रमशः दलाल बने पत्रकार...वसुलीबाजो का अड्डा बना सूरजपुर...कुकुरमुत्ते की तर्ज पर उगे पत्रकार...5 वी फेल बने पत्रकार...हत्या गभीर अपराधी बने पत्रकार...पत्रकारिता की आड़ में नशीली दवाईयों का कारोबार...

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