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: " देख रहा है ना बिनोद " कुर्सीनामा - 2

Admin

Sat, Nov 26, 2022

               

चन्द्र शेखर शर्मा पत्रकार

बात बेबाक

               " देख रहा है ना बिनोद " 

        दंगा पार्ट 2 के बाद बने जिले के राजनैतिक हालात , राजनीति के गिरते स्तर , नेताओ द्वारा खुलेआम बकी जाती माँ बहन की गालियाँ को देख लोग कहने लगे धर्मनगरी ऐसी तो कभी नही रही । फिलहाल राजनीति के मैदान में जिंदाबाद मुर्दाबाद के नारे से होते हुए माँ बहन तक पहुंची राजनीति को देख वेब सीरीज पंचायत 2 का डायलाग " देख रहा है ना बिनोद " इन दिनों जिले में ट्रेंड करने लगा है । 

       झंडा कांड वाले स्थल पर दो पड़ोसियों के बीच हुए विवाद पर पुलिस प्रशासन ने तत्तपरता दिखाते हुए कार्यवाही की किन्तु साहू सामाज के नेताओ के जातिवाद के मोर्चे के सहारे मैदान में कूदने और विश्व हिंदू परिषद के मोर्चा सम्हालने और कांग्रेस कार्यालय की ओर कूच करने की वजह से बने हालात को काबू में करने में प्रशासन के पसीने छूट गए । धर्म और जाति , हिन्दू मुस्लिम के नाम पर जिले में प्रारम्भ हुई राजनीति जिंदाबाद मुर्दाबाद से होते हुए माँ बहन तक पहुंच गई है । मतलब परस्त नेता का चोला ओढ़े ठेकेदार जो कभी रमन की चौखट में सुबह शाम हाज़री भर तलवे चाटते उनकी नैया डुबाने में लगे रहे अब सत्ता बदलते ही नए आका के दरबारी बन मतलब साध सत्ता की मालाई चाटने की कवायद में जिंदाबाद मुर्दाबाद में लगे है । 

        साहू समाज और विश्वहिन्दू परिषद के धरना प्रदर्शन और नगर बन्द भले ही सफल नज़र आता हों किन्तु साहू समाज की एकता खण्ड खण्ड होती नजर आने लगी । समाज के कांग्रेस समर्थित नेता अपने समाज के नेताओ के निर्देशों के विपरीत पत्रकार वार्ता कर समाज की कथित एकता खण्डित करते रहे । हांलाकि समाज के जिला व प्रदेश के पदाधिकारी नोटिस देने और पत्रकार वार्ता वीर सामाजिक नेताओं के समाज के सामने माफी मांगने की बाते कह समाज की एकता दिखाने व बताने का प्रयास कर रहे है । 

        जिले की राजनीति में लंबे समय से साहू , कुर्मी और पटेल समाज द्वारा अपनी सामाजिक एकता का हवाला दे कर विधानसभा टिकिट की मांग की जाती रही है । कवर्धा विधानसभा से साहू और पंडरिया विधानसभा से चन्द्रवंशी जातिगत संख्या गिना कर टिकट मांगते रहे है । ये बात अलग है की साहू समाज से आने वाला प्रत्यक्षी अकबर के दांव के आगे 60 हज़ार से चित्त हो जाता है तो चन्द्रवंशियों को चंद्राकर मात दे जाती है ।  

        राजनीति में जाति और धर्म का प्रवेश कोई नई घटना नही है । किन्तु कबीरधाम जिला जिसे धर्मनगरी के नाम से जाना पहचाना जाता है जहां ईद और दिवाली साथ साथ मनाई जाती रही हो वहां धार्मिक कट्टरता हिंदुत्व और मुस्लिम के सहारे कुर्सी तक पहुचने की कवायदें जिले की आबो हवा और तासीर बंदलने में लगी है । सीधे सहज सरल स्थानीय मुस्लिम कौम के बीच बाहरी मुसलमानों की घुसपैठ को लेकर बांग्लादेशी और रोहङ्गिया मुसलमानों को बसाने के आरोप लंबे समय से लग रहे है । जांच के नाम पर प्रशासन की खाना पूर्ति लोगो मे आक्रोश पैदा करने लगी है । कुछ अफसरों की दिखावे की स्वामी भक्ति ने पनपते आक्रोश की आग पर घी डालने का काम किया है । 

        हिन्दू मुस्लिम की लड़ाई , धर्म जाति और हिंदुत्व में उलझती जिले की राजनीति आगे और क्या गुल खिलाएगी यह तो समय के गर्भ में है । 

क्रमशः.........

और अंत में :-       

हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये ,

अपनी कुरसी के लिए जज्बात को मत छेड़िये ।

कल तलक जो हाशिए पर भी ना आते थे नज़र, आजकल बाज़ार में उनके कलेंडर आ गए ।।

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